Somvar (Monday) Vrat Katha
सोमवार व्रत कथा • सोमवारव्रतकथा
About
Somvar Vrat (Monday fast) is one of the most popular weekly fasts dedicated to Lord Shiva. Monday is called 'Somvar' as it is ruled by the Moon (Soma/Chandra), who adorns Lord Shiva's head. This vrat is especially observed during Shravan month. It fulfills wishes, removes sins, and brings the blessings of Lord Shiva and Parvati. The traditional katha, rooted in the Shiva Purana, narrates how a merchant and his wife attained great fortune through devoted Monday fasting, and how Lord Shiva himself demonstrated the power of this vrat through various trials.
सोमवार व्रत भगवान शिव को समर्पित सबसे लोकप्रिय साप्ताहिक व्रतों में से एक है। सोमवार को 'सोमवार' इसलिए कहते हैं क्योंकि यह चंद्रमा (सोम) द्वारा शासित है, जो भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं। यह व्रत विशेष रूप से श्रावण मास में किया जाता है। यह मनोकामनाएं पूर्ण करता है, पापों को नष्ट करता है और शिव-पार्वती का आशीर्वाद प्रदान करता है। शिव पुराण में वर्णित यह पारंपरिक कथा बताती है कि कैसे एक साहूकार और उसकी पत्नी ने श्रद्धापूर्वक सोमवार का व्रत करके महान सौभाग्य प्राप्त किया, और कैसे स्वयं भगवान शिव ने विभिन्न परीक्षाओं के माध्यम से इस व्रत की शक्ति प्रदर्शित की।
Quick Reference
Vrat Vidhi (Observance Method)
Sankalp (Resolve)
Wake up early on Monday morning and take a bath. Take a sankalp (vow) to observe the Somvar Vrat with devotion. The devotee should resolve to fast for 16 consecutive Mondays (Solah Somvar) or for the entire Shravan month.
Puja Vidhi (Worship)
Visit a Shiva temple or set up a Shiva Linga at home. Offer Panchamrit abhishek (milk, curd, ghee, honey, sugar) on the Shiva Linga. Offer Bel Patra (wood apple leaves), white flowers, dhatura, bhaang, and akshat (unbroken rice). Light a ghee diya and incense. Chant 'Om Namah Shivaya' 108 times using a Rudraksha mala.
Fasting Rules
Observe a full-day fast or eat only one meal. Some devotees consume only fruits, milk, and sabudana khichdi. Avoid salt, grains, and non-vegetarian food completely. The fast is broken after the evening puja and katha reading.
Katha and Aarti
In the evening, perform Shiva puja again. Read or listen to the Somvar Vrat Katha. Perform Shiva Aarti (Om Jai Shiv Omkara). Distribute prasad of panchamrit or panjiri among family and neighbours. Break the fast only after the complete puja.
संकल्प
सोमवार के दिन प्रातः काल उठकर स्नान करें। श्रद्धापूर्वक सोमवार व्रत का संकल्प लें। भक्त को लगातार सोलह सोमवार या संपूर्ण श्रावण मास व्रत रखने का संकल्प करना चाहिए।
पूजा विधि
शिव मंदिर जाएं या घर पर शिवलिंग स्थापित करें। शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें। बेलपत्र, श्वेत पुष्प, धतूरा, भांग और अक्षत अर्पित करें। घी का दीपक और धूप-अगरबत्ती जलाएं। रुद्राक्ष की माला से 'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जाप करें।
उपवास नियम
पूरे दिन का उपवास रखें या केवल एक समय भोजन करें। कुछ भक्त केवल फल, दूध और साबूदाना खिचड़ी ग्रहण करते हैं। नमक, अनाज और मांसाहार का पूर्ण त्याग करें। सायंकाल पूजा और कथा पाठ के बाद ही व्रत खोलें।
कथा और आरती
सायंकाल पुनः शिव पूजा करें। सोमवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें। शिव आरती (ॐ जय शिव ओमकारा) करें। पंचामृत या पंजीरी का प्रसाद परिवार और पड़ोसियों में बांटें। पूर्ण पूजा के बाद ही व्रत खोलें।
Katha
शिवपुराणे सोमवारव्रतकथा प्रारम्भः। एकस्मिन् नगरे एकः साहूकारः वसति स्म। स धनवान् आसीत् परन्तु सन्तानहीनः। तस्य पत्नी शिवभक्ता नित्यं शिवपूजां करोति स्म। एकदा एकः साधुः तां सोमवारव्रतं कर्तुम् उपदिशत्। षोडशसोमवारपर्यन्तं सा व्रतम् अकरोत्। शिवः प्रसन्नः भूत्वा स्वप्ने प्राकट्यम् अकरोत्। पुत्ररत्नं प्राप्स्यसि इति वरं दत्तवान्।
— Shiva Purana, Somvar Vrat Katha
बालकः वर्धमानः विद्यावान् गुणवान् अभवत्। तस्य विवाहः एकस्याः सुन्दर्याः कन्यायाः सह अभवत्। विवाहकाले कन्या मूर्च्छिता अभवत्। आकाशवाणी अभवत् - पूर्वजन्मपापेन इयं मूर्च्छा। षोडशसोमवारव्रतेन दोषः निवर्तिष्यते। कन्यया व्रतं कृतम् स्वस्था जाता सुखेन अवसत्।
— Shiva Purana, Somvar Vrat Katha
एकदा कैलासे भगवान् शिवः पार्वत्या सह चौपटं क्रीडति स्म। पार्वती पराजिता क्रुद्धा अभवत्। शिवः अवदत् - सोमवारव्रतस्य महिमा दर्शयामि। तौ पृथिव्यां अवतीर्णौ। शिवः ब्राह्मणवेषेण एकं नगरं प्राविशत्। तत्र एकः तैलिकः शिवभक्तः सोमवारव्रतं करोति स्म। शिवकृपया तस्य सर्वे मनोरथाः पूर्णाः अभवन्।
— Shiva Purana, Somvar Vrat Katha
एकस्मिन् नगरे एकः धनिकः वणिक् आसीत्। स शिवकृपया धनं प्राप्तवान् परन्तु गर्वेण व्रतं त्यक्तवान्। शिवकोपेन तस्य सर्वं धनं नष्टम् अभवत्। पत्नी अवदत् - पुनः व्रतं कुरु। स पश्चात्तापेन सोमवारव्रतम् अकरोत्। शिवः प्रसन्नः सर्वं धनं प्रत्यर्पितवान्। सोमवारव्रतं सर्वपापनाशकं सर्वमनोरथसिद्धिकरम्। ❙ इति श्रीशिवपुराणे सोमवारव्रतकथा सम्पूर्णा ❙
— Shiva Purana, Somvar Vrat Katha
Shiva Shlokas
ॐ नमः शिवाय॥ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नमः शिवाय॥ मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय। मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नमः शिवाय॥ शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय। श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नमः शिवाय॥ वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमूनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नमः शिवाय॥ यज्ञस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय। दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नमः शिवाय॥
— Shiva Panchakshari Stotram (Adi Shankaracharya)
शिवं शिवकरं शान्तं शिवात्मानं शिवोत्तमम्। शिवमार्गप्रणेतारं प्रणतोऽस्मि सदाशिवम्॥
— Shiva Dhyana Shloka
वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं वन्दे जगत्कारणम्। वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं वन्दे पशूनां पतिम्॥ वन्दे सूर्यशशाङ्कवह्निनयनं वन्दे मुकुन्दप्रियम्। वन्दे भक्तजनाश्रयं च वरदं वन्दे शिवं शङ्करम्॥
— Shiva Vandana Shloka